Friday, January 10, 2025

हार गया


हां मैं हार गया,
दूसरों को समझाते समझाते,
खुद को नजरअंदाज करते करते
मैं थक गया औरों की जिंदगी जीते जीते।

करूं कुछ अपने मन का,
तो सब नाराज़ हो जाता है।
बात मानू सबका तो,
स्वयं का अस्तित्व नहीं दिखता है।

अपना बात रखूं तो,
कोई उसे अहमियत नहीं देता है।
किसी की एक ना सुनूं तो,
मुझे तुरंत बुरा बनाया जाता है।

कैसे और किससे करूं,
अपने दिल का हाल बयां।
जिसे समझना था मुझे,
वो भी पूरी तरह मेरा हो ना पाया।

अपनी बात अपनो को ही
समझा नहीं पाता हूं।
किसी ओर की क्या बात करूं
खुद से खुद को विश्वास नहीं दिला पाता हूं।

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