%20(1).png)
वर्षों लग गई, हमे अंग्रेजो को भगाने में,
फिर भी आज हम विदेशी के गुलाम है।
पहले हम शारीरिक तौर पर,
अब मानसिक तौर पर, उनके नाम है।
देश के योद्धा जान की बाजी लगाते है,
और हम दुश्मनों को आर्थिक मदद कर रहे है।
जिस गोली से हमारे जवान छल्ली हो रहे है,
उस गोली को बनाने में, हम सहयोग दे रहे है।
हम अपनों के मेहनत का कभी कद्र नहीं करते,
पर गैरों के वस्तुओं को बढ़ावा दिया करते है।
हमारे अपने तो, हमेशा हमारे साथ ही रहते है,
पर वो तो चार दिनों में ठग कर, चल दिया करते है।
सिर्फ सीमाओं पर नहीं, हम घर से वार करेंगे,
देशी पदार्थो का हम, गर्व से इस्तेमाल करेंगे।
चलिए हम आज प्रण लेते है,
अपनों को सहयोग और दुश्मनों को ख़ाक करेंगे।
*****