प्यार करता था तुझे मैं,
शायद समय पर जता ना सका।
मोहब्बत समझने में भले ही देर हो गया,
किंतु दोस्ती निभाने में कभी चूक नहीं किया।
काश तुम समझ पाती
मेरे अनकहे भावनाओ को।
अपनी एहसास को छुपाने के वजाय,
बयान करती बिन घबराए।
कुछ वक्त और
अपने इश्क को बरकरार रखती।
आज हम दो नहीं एक होते,
अगर तुम थोड़ा और सब्र रखती।
कैसे मैं भूल जाऊं,
उस पल के हसीन यादों को।
जिस पल ने मुझे जीना सिखाया,
खुद से ज्यादा तुम्हें अपना बताया।
माना की समय के साथ सब भूल जाते है,
बिछड़े हुए यादों को।
कोई मुझे बता दे,
कैसे मैं भूल पाऊं तेरे एहसासों को।
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