Tuesday, March 25, 2025

पहली मिलन



मिलन की वो पहली नज़र,

शरमाई सी खड़ी वो लड़की।


ताक झाक वाली मेरी आँखें,

निहारने को उनको थी तरसी।


सबके सामने इधर उधर से,

मैं तो देखा उन्हें चोर नजर से।


नज़र चार होने से कतरा गई,

सबके सामने वो मुझसे ही शरमा गई।


परिवार के लिए भी थी वो अति प्रिय,

बनाना था उन्हें अपने घर की ऐश्वर्य।


उन्हें डर था कहीं वो अपने को खो न दे,

मैं तैयार था, उन्हें अपना सब कुछ देने।


अकेले मिलने की बारी जब आई,

पहले आप पहले आप कर वो लड़खड़ाई।


मैं अपना बताया वो बस सुनते रही,

पलके झुकाई, वो बस हां, हूं करते रही।


घबराए सी उन्हें लगा, एक अंजान के साथ है।

पहले सहज किया, फिर लगा वो मेरे साथ है।


उसने मुझे देखा या नहीं,

किंतु उन्हें लग गया, मैं ही हूं उनके लिए सही।

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