Sunday, March 9, 2025

यादें



तन्हा रातें,

तेरे साथ वो हसीन मुलाकाते।

अक्सर बेकाबू कर देती है,

तेरे गैरहाजरी में मेरी जाज़बाते।


सिर्फ याद ही नहीं,

तेरी एहसास भी आ जाती है।

मुझे तड़पा कर,

सारी रात बेचैन कर जाती है।


खुशबू वो तेरे बदन का,

तेरे चले जाने के बाद तड़पाती है।

तेरी वो नटखट हरकते,

मेरे सामने बार बार नजर आती है।


बंद कमरे में तारे नहीं,

तेरा ही चेहरा का दीदार होता है।

मैं लाख चाहूं याद न करूं तुझे,

किंतु यह दिल को कहां समझ आता है।

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